Frozen Heart

I witnessed a miracle today
The power of love
Failed to melt a frozen heart
Sometimes it is the circumstances
Sometimes it is the person

Imagine

Imagine

Living a lie

And then starting to assume it to be real.

Imagine

Most of us doing it.

And imagine

A few truths we know

Are just works of imagination.

तस्वीर

कभी दादा दादी या नाना नानी की याद आती है
तो मैं पुरे तस्वीर देखकर मन बेहला लेती हूँ
पर अब तसवीरें भी धुंधली हो चली हैं
कितना अच्छा होता
अगर उनके ज़माने में भी तसवीरें लेना आम सी बात होती
फिर तो मेरे पास उनकी यादों का पिटारा होता
कुछ गिने चुने नहीं, अनेको यादें होती

तुम कभी आवाज़ लगा कर देखो

तुम कभी आवाज़ लगा कर देखो
मैं दौड़ी चली आऊँगी
थोड़ा आपने आस पास के लोगों के आगे देखो
मैं वही खड़ी हूँ
पर तुमको दिख नहीं रही हूँ
तुम कभी आवाज़ लगा कर देखो
मैं दौड़ी चली आऊँगी

बचपन के दोस्त

आज सालों बाद
समय मिला है
अपना मान टटोल कर ढूंढ रही हूँ
बचपन के दोस्तों को
जिनके साथ मैं खेला करती थी
कुछ के नाम याद है
कुछ के चेहरे याद है
और बस कुछ यादें याद है
वही दिन थे भोलेपन और मासूमियत के
अब तो पता नहीं
मैं किसी को याद हूँ भी या नहीं
तो वैसी दोस्ती ना कायम रह पायेगी
क्योंकि अब वो भोलेपन और मासूमियत के दिन
कभी वापस ना आ पाएंगे.

The days of our lives

The days of darkness
Makes me realise
The value of the days of brightness

Equal are all the days
Some are bright
Some are not
But they all add up and make our life whole

Monsoon love

When it rains
And the plains start to flood
That is when I think of you
And all the monsoons that we spent together
I wonder
If our love was seasonal
Just like the rains

There are days

There are days when I cannot see the sun shine
There are days when everything is gloomy
But there are never such days
When I see your face
And nothing seems imperfect.

वक़्त

धीरे धीरे वक़्त गुज़रता गया
और हमें पता भी ना चला
जब तक हमें होश आया
और जब तक हमने ज़माने की तरकीबें सीखी
तब तक हम कब्र में पहुँच गए

हम मज़हबो में अंतर नहीं समझ पाए

जब हम छोटे थे
तो हर कुछ साल के अंतराल
पिताजी का तबादला हो जाता था

कभी हमारे पड़ोसी हिंदू थे कभी मुस्लिम
कभी सिख कभी इसाई
कभी बौद्ध कभी जैन

कभी स्कूल और कलॉज़ में
दोस्तों के साथ रहते हुए
मज़हबो में अंतर नहीं समझ पाए

एक उम्र गुज़र गयी है
पर हम मज़हबो में अंतर नहीं समझ पाए
जो अब तक नहीं समझ पाए
वह आगे समझ कर क्या करेंगे

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